Saturday, December 10 2016, 12:44:10
logo
  • bulletin
  • fatasstic
  • She Says

BRAIDED TIGHTLY – Story for a theatric play

  • JWB Post
  •  January 30, 2014

 

सख्त गुंथी हुई चोटी

“माँ , दुखता है.”

जवाब में माँ ने बाल और भी खींच कर बना दिए. तंग आवाज़ में बोली, ” खुले छोड़ कर हिरोइन बन कर जाएगी स्कूल? बड़ी आई, दुखता है.’

चंदा चुप हो गयी, उसे पता था माँ के लिए वैसे ही मुश्किल है. माँ ने चोटी बाँध दी तो चंदा उठी और रसोई कि तरफ बढ़ गयी, सिर्फ १२ साल कि थी पर जिम्मेवारी अभी से सर पर थी. रसोई में रात के बर्तन जमाये और झाड़ू उठाकर उसने जल्दी जल्दी आँगन और दोनों कमरे साफ़ किये.

माँ रोटी बना चुकी थी , चंदा ने चार रोटी उठाई और प्लेट में रख कर, २ ग्लास छाछ के साथ छोटी बहनों लता और पूनम को दी , फिर रोटी और फली कि सब्जी डाल कर आँगन में बाबूजी को देने चली गयी. बाबूजी ने बिना गर्दन उठाये टेबल कि तरफ इशारा कर दिया और चारपाई पर बैठे अखबार पढ़ते रहे. चंदा का छोटा भाई वहीँ बैठा था, चंदा ने उसे गोदी उठाया और रसोई में ले गयी, मंगल सिर्फ दो साल का था. लता खाना खाकर पास के स्कूल में चली गयी,

पूनम अभी तक स्कूल नहीं जाती थी. चंदा को इस साल से २ कोस दूर बड़े स्कूल में जाना पड़ता था. बड़ा मुश्किल था, बाबूजी तो बिलकुल नहीं चाहते थे , बस माँ ने कहा जाने दो. दो-तीन साल में ब्याह देंगे, कोई नहीं थोडा पढ़ जाएगी.

चंदा ने अपनी दो रोटी कपडे में बाँधी और झोले में रख ली.

IndianGirlTrain

” माँ, मैं जाऊं ?”

माँ ने तीखी नज़रों से चंदा को ऊपर से नीचे तक देखा. एक सादी सी बच्ची दिखाई दी, कस के गुंथी हुई चोटी, सादा नीले रंग का पूरी बाजू का ढीला सलवार कमीज़ और सफ़ेद सूती दुपट्टा. कानो में छोटी छोटी चाँदी कि बाली.

” ए री , यह दुपट्टा ठीक से खोल कर डाल, और ध्यान से जाइयो. सीधे , ठीक है ? कही प्रीतो से बातें करती करती राह भूल जाये . रास्ते में किसी से बात न करना और न ही रुकना ” समझ गयी ?

चंदा ने सर हिला दिया, दो महीने से रोज़ यही सुन कर जाती थी. कभी आराम से कभी गुस्से में कहे गए यही शब्द. मक्केकेखेतोंमेंसेहोती हुई चंदा निकल गयी, आज उसकी सहेली प्रीतो नहींआ रही थी , माँको बोलती तो उसेभी घर बिठा लेती और आज स्कूल मेंकविता प्रतियोगिता थी. चंदा नेसुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी कविता ”

खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी ” कंटस्थ करी थी. आज तो उसे पुरूस्कार मिलेगा ही. वह कविता बोलती बोलती अपनी ही धुन में कभी ऊँची फसल में दिखती कभी छुपती भागती जाती रही.

“लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार, देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,

नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार, सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार।

महाराष्टर-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।”

शाम हो चली थी. मंगल के बापू घर नहीं आये थे, माँ चक्कर लगा कर परेशान हो चुकी थी. कुछ समझ नहीं आ रहा था. सूरज के साथ उम्मीद और दिल दोनों डूब रहे थे. दरवाज़ा खुला तो भाग कर गयी.

” कुछ पता चला ? कहाँ है मेरी बच्ची ?”, आंसू बह निकले.

” कुछ नहीं, स्कूल तो गयी थी , अभी मास्टरनी से मिल कर आया हूँ. कविता सुनाने में पुरूस्कार जीता है आज, तो

सबको याद है. पता नहीं कहा गयी?”, आवाज़ में गुस्सा भी था और डर भी. लता और पूनम सहमी खड़ी थी, मंगल आँगन में बैठा बेखबर खेल रहा था .

” कहा था तुझे मत भेज स्कूल, पर तुझको को तो पढ़ाना था न छोरी को? कोई ऊंच नीच हो गयी तो कोई ब्याह कर भी नहीं ले जायेगा और यह दोनों भी बैठी रहेंगी मेरी छाती पर. जा री पानी लेकर आ”, बाबूजी के गुस्से से दोनों काँप गयी फिर लता जल्दी से घड़े से लोटा पानी ले आई और माँ को पकड़ा दिया. बाबू के पास जाने कि हिम्मत न थी.

उमेद माथा पकड़ कर बैठ गया, सत्यानाश हो. मन में डर था, भय उससे अन्दर से लील रहा था. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. सारा रास्ता कई बार घूम आया , आवाज़ भी दी पर ज्यादा जोर से नहीं. मास्टरनी को भी कहानी सी सुना दी कि शायद बुआ के चली गयी होगी. बस ऐसे ही पूछने चला आया. पर उसकी आँखों का खौफ तो पढ़ लिया था मैडम जी ने.

“पुलिस में कहे तो?”, मंगल की माँ धीरे से बोली.

लोटा फ़ेंक कर मारा दीवार पर, और चिल्लानेलगा , ” इज्ज़त बेच दो मेरी , एक बार पुलिस मेंबात गयी तो, जात बिरादरी मेंतो नाक कट ही जाएगी. तूमुझेज़हर देदे.”

मंगल की माँ चुप हो गयी, मंगल रोने लगे था , वह उसे उठाकर एक तरफ बैठ कर दूध पिलाने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे उसका दम घुट रहा है, कहाँ है चंदा?

थोड़ी देर में उठ खड़ी हुई और बोली, ” मैं प्रीतो के यहाँ पूछ कर आती हूँ, वो तो नहीं गयी पर शायद कुछ पता हो.”

बिना जवाब सुने , उसने मंगल को कमर पर रखा और दरवाज़े की तरफ बढ़ गयी. उसे डर था की मंगल का बापू न जाने देगा और मारेगा पर मुड कर देखा तो वह सर पकडे बैठा था.

दरवाज़ा खोला तो सामने चंदा खड़ी थी.

पर क्या यह वही चंदा थी जो सुबह घर से निकली थी? आँखों में मासूमियत की जगह डर भरा था, चेहरे पे एक अजीब सा तेज़ था.

बाल बिखरे हुए थे , कपडे फटे, खून के धब्बे. उसे अन्दर खींचा और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर लिया.

“क्या हुआ ?? क्या हुआ??”, वह चिल्लाने लगी. ” कहाँ थी इतनी देर, कुछ बोलती क्यों नहीं?” पकड़ कर झकझोर दिया चंदा को, उसका सर गुडिया कि तरह हिला , बाल और बिखर गए और रोने लगी.

tn_meh.ro11166

” माँ, माँ ,” घुटी हुई आवाज़ में कुछ बोलना चाह पर रो पड़ी. मंगल की माँ ने इतनी जोर से कंधे पकडे कि चंदा कि सुबकी निकली, धीरे से बोली, “माँ ,चोटी से पकड़ कर खींच ले गए खेतों में, पर माँ ….माँ “.

माँ तो जैसे पत्थर कि हो गयी. चंदा बेहोशी कि हालत में थी, लता भागी आई और बहन से चिपट कर रोने लगी. बरामदे में रुन्दन कि आवाज़ बढ़ने लगी.

उमेद का दिल पसीज गया और बोला, ” ले जा बेचारी को, कुछ खिला-पिला दे, फिर देखेंगे.” सच का सामना तो करना ही था, पर उमेद अपने कानो से नहीं सुनना चाहता था, इतनी हिम्मत न थी. उसकी माँ को ही पूछने दे. अब तो जो होना था हो चुका.

तीन महीने बाद

ज़िन्दगी ऊपर ऊपर सेचलती रही. पर सब कुछ बदल गया था. चंदा को अब स्कूल जाना मना हो गया था. घर का काम करती और मंगल को संभालती. उसनेमाँकेसामनेलाख दलील करी पर एक न सुनी माँने.

” एक बार तो बच गयी , अब दोबारा मौका देंगे कमीनो को? तेरा बाबू मुझे भी जान से मार देगा और तुझे भी, समझी?”

चंदा टूट गयी, यह सीला मिला उस दिन कि हिम्मत का ? उन दो लड़कों को काट कर भागी, लड़ी , कितने घंटे खेतों में छुप कर बिताये फिर घर सही सलामत पहुँच गयी तो भी गलती उसकी? अपनी इज्ज़त कि रक्षा करी तो भी वही कसूरवार है ? हिम्मत दिखाई तो उसे बुजदिलों कि तरह घर में बंद कर किया? पढाई छुडवा दी, अब विवाह कि बात कर रहे हैं. उस दिन मर गयी होती तो अच्छा था.

क्या कसूर है मेरा?

सब्जी काटते -काटते रुआंसे स्वर में चंदा गाने लगी

“जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी, यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी, होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी, हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।

तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

By Dr. Anita Hada Sangwan,

Talk show host at “ETV Rajasthan”. Activist NGO “Prem Mandir Sansthan”. Member of ‘RAYS”- for HIV+ve Children. Volunteer for Eye Donation. Founder member – Justice for Women. Writer.

Contact us for your story


adv-1

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • JWB along with the brand Jewel Saga bring you a selfie contest inspired by the campaign AidToMaid.

need help

X