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THEY PARTED TO MEET AGAIN: Final Day of JLF

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  •  January 23, 2014

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल शब्दो का मेला जँहा हर कोई कुछ खोजता हुआ नज़र आया पर किसी को कुछ मिला नहीं . वह होकर इतनी भीड़ भाड़ में  इतने लोगो के बीच में यही अहसास होता कुछ तो खो गया  हैयहाँ  जो पूरा जयपुर उमड़ रहा है उसे खोजने के लिए .आखिरी दिन बरसात से सर्द हुआ मौसम कविता कहानियो और किस्सो के बीच और भी मदहोशी वाला था .

कही कविताये इठला रही थी तो कही कहानी . कविता की कहानी विषय पर यतींद्र मिश्र की अशोक वाजपेयी से हुई .  कविता हमें वो सब दिखाती है जो हम ज़िन्दगी में नहीं देख पाते  .  पेड़-पौधों पर आने वाली नीली चिडिय़ा की अठखेलियां, बारिश कि बूंदे , फलक की खूबसूरती और चांदनी की शीतलता का अहसास हम कविताओं के माध्यम से ही कर पाते हैं।

10763_10152121296080139_765763765_n आखिरी  दिन डिग्गी पैलेस में बारिश की वजह से कई वेन्यू बदले गए। चार बाग भी बड़े लॉन की बजाय एक कमरे में शिफ्ट किया गया, फिर भी लिटरेचर के दीवाने लोग  अशोक वाजपेयी, पवन वर्मा, गीतांजली श्री और जॉन इलियट को सुनने  पहुंचे।ऑथर पवन वर्मा का कहना है कि आपकी आइडेंटिटी आपसे अलग कभी नहीं होती। अगर आप अमृतसर से हैं तो चंडीगढ़ में अमृतसरी हो जाता है, दिल्ली में पंजाबी और लंदन में इंडियन। ये बदलती जरूर है पर ये अलग कभी नहीं होती।

कहानियो पर चर्चा करते हुए  विक्रम चंदा कहने लगे लिटरेचर में शॉर्ट स्टोरी मिनएचर पेटिंग की तरह होती है। जहां हर सेंटेंस हर वर्ड बहुत ही फोकस्ड और मीनिंगफुल होना चाहिए। इसमें ना तो लम्बी बाते होती है ना ही कहानी में माहौल का जिक्र आता है।

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थिएटर, टेलीविजन और सिनेमा की दुनिया से जुड़े डायरेक्टर अनुराग बासू ने स्क्रिप्ट राइटर पूर्णेंदु के साथ, ‘अ बुके ऑफ स्टोरीज’ सेशन के दौरान जी. टी.वी पर आने वाले अपने नए शो , ‘अ बुके ऑफ स्टोरीज’ के अंतर्गत टेलीविजन इंडस्ट्री में आने वाले डायरेक्टोरियल और लेखन के चैलेंजेज पर चर्चा की।

 ‘इट्स ए बर्ड , इट्स ए प्लेन, इट्स हनुमान: टेल्स ऑफ द मंकी गॉड ‘ में रामायण के प्रमुख किरदार हनुमान की चर्चा हुई   . जिसमें उन्होंने बताया कि हनुमान किसके पुत्र थे, उनकी शक्तियां उनके  बचपन में की शरारतों के बारे में बताया। वहीं हनुमान की पूजा क्यों की जाती है जैसे, तमाम तथ्यों से स्टूडेंट्स को रूबरू कराया। और सोनम कालरा ने ‘फाइंडिंग योर वाइस’ में खूबसूरत सुनाये . 

शब्दो के समंदर के आखिरी दिन एक सूनापन नज़र आया शायद साहित्य के ये मोती जो एक सूत्र में  पिरोकर एक माला के रूप में नज़र आ रहे थे आज फिर आती जाती लहरो कि तरह अलग होने जारहे थे . अगले साल फिर मिलने के वादे के साथ .

By Anshu Harsh, Owner and Publisher Simply Jaipur

Special Thanks for photos to Somendra Harsh.

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